Friday, 10 February 2017

यही तो खूबी है कहानी की!

कहानी हिंदी में लेखन की एक विधा है. और अगर विकिपीडिया की माने तो ये बस उन्नीसवीं सदी में शुरू हुई थी. पर मुझे तो लगता है मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और तभी से कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया. बच्चो और कहानियो का नाता बड़ा पुराना रहा है. असल में बच्चे ही कहानियो को कहानी बनाते है. क्योंकि कहानी के चार तत्वो में से एक "प्रभाव" बच्चो पर ही सबसे ज्यादा देखा जा सकता है कहानी सुनने के बाद. बाकी के तीन कहानी के तत्व "रोचकता", "वक्‍ता" एवं "श्रोता" होते है. ये चार तत्व मिल कर कथावस्तु, पात्र, संवाद, वातावरण, भाषा-शैली तथा उद्देश्य निर्धारित करते है किसी कहानी का.

मुझे तो अपने बेटे का धय्न्वाद देगा होगा क्योंकि वो मेरे जीवन में कहानियो को फिर से ले आया. बड़े होने के साथ-साथ हमारा कहानियो के प्रति झुकाव बदलता जाता है. हम आसान से लगने वाले आख्यो से जटिल विषयो की तरफ जाने लगते है. पर जैसे ही कोई बच्चा आपके जीवन में उन पुरानी और आसान कहानियो को वापस ले आता है वैसे ही जीवन में एक सरलता महसूस होने लगती है. मुझे तो हुई है पूरी तरह से. अब मन "the vinci code" के बजाय "चम्पक" की तरफ फिर से भागने लगा है. मेरे घर में भी एक २ साल का कहानी का कीड़ा है जिसे हर समय कहानी सुनना पसंद है. चाहे दिन हो या रात, घर के अंदर या बाहर, बस "मम्मा स्टोरी सुनाओ". पापा भी नही बच पाते उसकी कहानियो के लिए होने वाली चुलबुलाहट से. वो भी नई नई कहानिया निकालते रहते है अपने पिटारे से. अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने ध्यान दिया कि पापा बेटे को रामायण कहानी की तरह सुना रहे है. मुझे लगा ये २ साल का अबोध क्या समझ पाएगा कि राम वन क्यों गए थे और रावण को क्यू मारा उन्होंने. पर कहानी तो बस कहानी होती है. कहानीकार चाहे तो कुछ भी समझा सकता है सुनने वाले को और वही हुआ. मेरे बेटे को पूरी रामायण का सारांश याद हो गया है कहानी के रूप में. एक दिन बस में ऑफिस से आते समय वो मुझे सुनाने लगा अपनी नई कहानी. वैसे तो मैंने ही उससे कहा था सुनाने को ताकि उसका ध्यान ड्राइवर अंकल से हटा सकूँ. पिछली सीट पर बैठी मेरी बस मेट ऋचा ने कहा "विश्वास नही होता कि इसने इतनी आसानी से सुना दिया कि राम जी की कहानी क्या है!" तो आसान शब्दो में मेरे पतिदेव द्वारा रची गई राजा राम की कहानी कुछ ऐसी है :
" एक बार एक राजा होता है उसका नाम दशरथ होता है. उसकी तीन रानिया होती है. कौशिल्या, सुमित्रा और कैकेयी. राजा के चार बेटे होते है. राम, लक्छ्मण, भरत और शत्रुघ्न. एक दिन कैकेयी गुस्सा हो जाती है और राजा से कहती है कि राम और लक्छ्मण को जंगल भेज दो और भरत को राजा बना दो. पर राजा कहता है मैं तो नही भेजूंगा जंगल क्योंकि मैं राम से बहुत पारु करता हूं. कैकेयी बोलती है आपको भेजना पड़ेगा क्योंकि आपने प्रॉमिस किआ था. तो राम और लक्छ्मण जंगल चले जाते है और उनके साथ सीता जी भी जाती है. जंगल में रावण झोली बाबा बन कर आता है और सीता जी को लंका उठा ले जाता है. फिर राम जी लंका जाते है और रावण से फाइट करते है, युद्ध करते है. और रावण को हरा कर सीता जी को वापस ले आते है जिससे सीता जी हैप्पी हो जाती है. राम जी भी हैप्पी हो जाते है. सब लोग हैप्पी हो जाते है और फिर दिवाली मानते है."
कुछ चीजे मैं यहाँ आसान कर देती हूं. "झोली बाबा" नाम का एक पात्र हमने रचा है अपने बेटे के लिए जो एक अनजान बच्चो को उठा ले जाने वाला आदमी है. रावण इस तरह झोली बाबा है. पारु शब्द का मतलब प्यार से है. कुछ शब्द इस कहानी में अंग्रेजी के है क्योंकि हमारा छौना यही अंग्रेजी के शब्द ज्यादा बोलता है. बाकी तो बस कहानी है ये जैसे चाहे वैसे ढांचे में ढल जाती है. यही तो खूबी है कहानी की!

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